पाठशाला बना मधुशाला
ये तूफ़ान तू अपनी खेर कर... हम तो लहरें हैं, तेरे आने पे हम और बड़े हो जाते हैं। ये सोच ही है जो हर पल आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। विकट परिस्थितियों में भी हमें लक्ष्य से नही हटना चाहिए। क्योकि सच्चा योद्धा वही है जो रण में डटा रहे। परिषदीय विद्यालय व उसके प्रांगण को अक्सर लोग अपनी गन्दी गतिविधियों को करने का माकूल जगह समझतें हैं। बीवी भाग गयी तो देसी पीने के लिए विद्यालय के कक्षा कक्ष के दरवाजे पे लगे ताले को तोड़केे कमरे में चखने के साथ चार यारों के साथ ग़म बाटलें। ग्रीष्मकालीन अवकाश के पश्चात जब विद्यालय पहुचे तो एक कमरे का ताला तोड़के कुछ लोगों ने पाठशाला को मधुशाला में परिवर्तित कर दिया। प्रथम दिवस विद्यालय पहुँचे तो देखे एक कमरे का ताला टूटा पड़ा है और अंदर शीशियाँ पड़ी हैं। गाँव में भ्रमण करके लोगों को जागरूक किया गया व उनकी विद्यालय के प्रति ज़िम्मेदारी से अवगत कराया गया। मगर लगता है कुछ लोगों ने सोचा होगा क्यों न ज़िम्मेदारी को ही खत्म कर दिया जाये। अगले दिन सर्व शिक्षा अभियान रैली निकालना था, पर ये क्या आज तो कुछ ज्यादा ही नुकसान कर दिया गया। विद्यालय के गेट में लगे छड़ो को...